Parineeti Chopra
Sunday, July 29, 2012
Friday, July 6, 2012
Sunday, May 13, 2012
Ishaqzaade Got Gud Response
नामी स्टार्स और विदेशी लोकेशन का मोह छोड़कर यश राज बैनर ने नई स्टार कास्ट के साथऐसी लव स्टोरी को अपनी
फिल्म का सब्जेक्ट बनाया है , जिसमें प्यार से कहीं ज्यादा नफरतभरी है। इस फिल्म में ऐसा हर मसाला मौजूद है ,
जो यंगस्टर्स की पसंद पर फिट बैठने का दमरखता है। दरअसल , मल्टिप्लेक्स कल्चर के दौर में फैमिली क्लास की फिल्मों से
बढ़ती दूरियोंके बीच अब फिल्म मेकर्स फिल्म हिट करने की चाह में ऐसी स्क्रिप्ट पर काम करने में लगे हैं ,
जिसमें ऐसा हर मसाला फिट हो सके जो यंगस्टर्स को पसंद आए।
' इशकजादे ' भी पूरी तरह से दो जवां दिलों की ऐसी लव स्टोरी है , जिसमें इन प्रेमियों कोअपना अलग मुकाम बनाना है। इस फिल्म के डायरेक्टर हबीब फैजल उस वक्त लाइमलाइट में आए जब उनकी फिल्म ' दो दूनी चार ' नैशनल अवॉर्ड के लिए चुनी गई। हबीब की इन दोनोंफिल्मों का
दूर - दूर तक कहीं कोई लेना देना नहीं है। हां इतना जरूर है कि इस बार भी हबीबने अपनी तरफ से इस फिल्म के
जरिए दर्शकों को मेसेज देने की कोशिश जरूर की है। आज केदौर में जब हर कोई कामयाबी हासिल करने के मिशन में
दूसरे को किसी भी सूरत में पछाड़नेकी होड़ में लगा है। ऐसे में ' इशकजादे ' की लीड जोड़ी एक सुंदर सा मेसेज जरूर देती है।
फिल्म के डायरेक्टर हबीब की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने कहानी और किरदारों कीडिमांड पर इंडस्ट्री के नामी
स्टार्स का मोह छोड़ा और ग्लैमर नगरी से कोसों दूर यूपी के छोटे सेशहर हरदोई की लोकेशन पर फिल्म को शूट किया।
कहानी : यूपी के छोटे से शहर का रहने वाला परमा ( अर्जुन कपूर ) अपने दादा का हर ख्वाबपूरा करना चाहता है।
बचपन से दादा उसके आदर्श रहे हैं। परमा अपने दादा को दिखा देनाचाहता है कि वह भी किसी से कम नहीं है। परमा
दूसरे लड़कों की तरह रोमांटिक नहीं है ,बल्कि गुस्सा तो हर वक्त उसकी नाक पर सवार रहता है। परमा के दादा एमएलए
का चुनावलड़ रहे हैं और परमा का मकसद अपने दादा को हर हाल में चुनाव जिताना है। दूसरी तरफ ,
जोया ( परिणिति चोपड़ा ) एक पॉलिटिकल फैमिली बैकग्राउंड से है। जोया ने बचपन से घर में राजनीति की
एबीसीसीखी है। जोया के पिता परमा के दादा के अपॉजिट चुनाव लड़ रहे हैं और जोया उनके चुनाव की कमान संभाले हुए हैं।बिंदास , बहादुर , बोल्ड जोया और अर्जुन अक्सर एक दूसरे के आमने सामने होते हैं। शहर में जब जब वर्चस्व की
बातआती है तो इस लड़ाई में जोया और परमा को एक दूसरे पर बंदूक तानने से भी परहेज नहीं होता। चुनावी माहौल में
जबइस छोटे से शहर में गुंडागर्दी और अराजकता का माहौल होता है , परमा अपना मकसद पूरा करने के लिए जोया के
साथप्यार का नाटक खेलता है , जो प्यार के रास्ते से होते हुए एक बार फिर रंजिश के शिखर पर पहुंचता है।
ऐक्टिंग : बेबाक , बिंदास जोया के किरदार को परिणिति चोपड़ा ने अपने सशक्त अभिनय से जिंदा कर दिखाया है।
अर्जुन कपूर ने अपनी पहली फिल्म में साबित किया कि इंडस्ट्री में उनकी एंट्री पापा ( बोनी कपूर ) के नाम के सहारे नहीं ,बल्कि अपने दमखम पर हुई। गुस्सैल और बात - बात पर तमंचा चला देने वाले परमा का किरदार
अर्जुन ने कुछ इस तरहसे निभाया है जैसे राइटर ने यह किरदार उनके लिए ही लिखा था।
डायरेक्शन : हबीब ने कहानी को बेवजह कहीं भटकने नहीं दिया। कसी हुई स्क्रिप्ट और फिल्म के हर किरदार पर कीगई
मेहनत का असर है कि फिल्म की रफ्तार कहीं कम नहीं पड़ती। हालांकि , फिल्म का क्लाइमेक्स चौंकाने वाला है ,लेकिन
हबीब ने इसे कुछ ऐसे ढंग से फिल्माया है कि क्लाइमेक्स दिल को छू लेता है।
संगीत : अमित त्रिवेदी का बेहतरीन म्यूजिक कहानी और फिल्म के माहौल पर सौ पर्सेंट फिट है।
क्यों देखें : अर्जुन कपूर और परिणिति चोपड़ा की केमिस्ट्री और दोनों का बेहतरीन अभिनय देखने लायक है।
यूपी केएक छोटे से शहर की आउटडोर लोकेशन और हबीब फैजल की कसी हुई स्क्रिप्ट फिल्म का प्लस पॉइंट है।
फिल्म में हरऐसा मसाला मौजूद है , जो यंगस्टर्स की कसौटी पर खरा उतरने का दम रखता है।
फिल्म का सब्जेक्ट बनाया है , जिसमें प्यार से कहीं ज्यादा नफरतभरी है। इस फिल्म में ऐसा हर मसाला मौजूद है ,
जो यंगस्टर्स की पसंद पर फिट बैठने का दमरखता है। दरअसल , मल्टिप्लेक्स कल्चर के दौर में फैमिली क्लास की फिल्मों से
बढ़ती दूरियोंके बीच अब फिल्म मेकर्स फिल्म हिट करने की चाह में ऐसी स्क्रिप्ट पर काम करने में लगे हैं ,
जिसमें ऐसा हर मसाला फिट हो सके जो यंगस्टर्स को पसंद आए।
' इशकजादे ' भी पूरी तरह से दो जवां दिलों की ऐसी लव स्टोरी है , जिसमें इन प्रेमियों कोअपना अलग मुकाम बनाना है। इस फिल्म के डायरेक्टर हबीब फैजल उस वक्त लाइमलाइट में आए जब उनकी फिल्म ' दो दूनी चार ' नैशनल अवॉर्ड के लिए चुनी गई। हबीब की इन दोनोंफिल्मों का
दूर - दूर तक कहीं कोई लेना देना नहीं है। हां इतना जरूर है कि इस बार भी हबीबने अपनी तरफ से इस फिल्म के
जरिए दर्शकों को मेसेज देने की कोशिश जरूर की है। आज केदौर में जब हर कोई कामयाबी हासिल करने के मिशन में
दूसरे को किसी भी सूरत में पछाड़नेकी होड़ में लगा है। ऐसे में ' इशकजादे ' की लीड जोड़ी एक सुंदर सा मेसेज जरूर देती है।
फिल्म के डायरेक्टर हबीब की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने कहानी और किरदारों कीडिमांड पर इंडस्ट्री के नामी
स्टार्स का मोह छोड़ा और ग्लैमर नगरी से कोसों दूर यूपी के छोटे सेशहर हरदोई की लोकेशन पर फिल्म को शूट किया।
कहानी : यूपी के छोटे से शहर का रहने वाला परमा ( अर्जुन कपूर ) अपने दादा का हर ख्वाबपूरा करना चाहता है।
बचपन से दादा उसके आदर्श रहे हैं। परमा अपने दादा को दिखा देनाचाहता है कि वह भी किसी से कम नहीं है। परमा
दूसरे लड़कों की तरह रोमांटिक नहीं है ,बल्कि गुस्सा तो हर वक्त उसकी नाक पर सवार रहता है। परमा के दादा एमएलए
का चुनावलड़ रहे हैं और परमा का मकसद अपने दादा को हर हाल में चुनाव जिताना है। दूसरी तरफ ,
जोया ( परिणिति चोपड़ा ) एक पॉलिटिकल फैमिली बैकग्राउंड से है। जोया ने बचपन से घर में राजनीति की
एबीसीसीखी है। जोया के पिता परमा के दादा के अपॉजिट चुनाव लड़ रहे हैं और जोया उनके चुनाव की कमान संभाले हुए हैं।बिंदास , बहादुर , बोल्ड जोया और अर्जुन अक्सर एक दूसरे के आमने सामने होते हैं। शहर में जब जब वर्चस्व की
बातआती है तो इस लड़ाई में जोया और परमा को एक दूसरे पर बंदूक तानने से भी परहेज नहीं होता। चुनावी माहौल में
जबइस छोटे से शहर में गुंडागर्दी और अराजकता का माहौल होता है , परमा अपना मकसद पूरा करने के लिए जोया के
साथप्यार का नाटक खेलता है , जो प्यार के रास्ते से होते हुए एक बार फिर रंजिश के शिखर पर पहुंचता है।
ऐक्टिंग : बेबाक , बिंदास जोया के किरदार को परिणिति चोपड़ा ने अपने सशक्त अभिनय से जिंदा कर दिखाया है।
अर्जुन कपूर ने अपनी पहली फिल्म में साबित किया कि इंडस्ट्री में उनकी एंट्री पापा ( बोनी कपूर ) के नाम के सहारे नहीं ,बल्कि अपने दमखम पर हुई। गुस्सैल और बात - बात पर तमंचा चला देने वाले परमा का किरदार
अर्जुन ने कुछ इस तरहसे निभाया है जैसे राइटर ने यह किरदार उनके लिए ही लिखा था।
डायरेक्शन : हबीब ने कहानी को बेवजह कहीं भटकने नहीं दिया। कसी हुई स्क्रिप्ट और फिल्म के हर किरदार पर कीगई
मेहनत का असर है कि फिल्म की रफ्तार कहीं कम नहीं पड़ती। हालांकि , फिल्म का क्लाइमेक्स चौंकाने वाला है ,लेकिन
हबीब ने इसे कुछ ऐसे ढंग से फिल्माया है कि क्लाइमेक्स दिल को छू लेता है।
संगीत : अमित त्रिवेदी का बेहतरीन म्यूजिक कहानी और फिल्म के माहौल पर सौ पर्सेंट फिट है।
क्यों देखें : अर्जुन कपूर और परिणिति चोपड़ा की केमिस्ट्री और दोनों का बेहतरीन अभिनय देखने लायक है।
यूपी केएक छोटे से शहर की आउटडोर लोकेशन और हबीब फैजल की कसी हुई स्क्रिप्ट फिल्म का प्लस पॉइंट है।
फिल्म में हरऐसा मसाला मौजूद है , जो यंगस्टर्स की कसौटी पर खरा उतरने का दम रखता है।
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